कासी के बहाने से, एक कविता...
कासी है छितराया चहुँ ओरमौसम है बरसात काऔर अपनी खूबसूरती से सबको मोहताइठलाता बादलों और सूरज की गर्माहट से।सृजन में रत रहती है दुनिया,जमीन ढीली होकर धसने देती है बीजों को।जो वनस्पतियां मरणासन्न हो चुकी होती हैं,वे प्राण पाती हैं पुनः।